27th death anniversary of Utpal Dutt | 27th Death Anniversary: उत्पल दत्त ‘एक्टिंग’ की दुनिया में इस वजह से आए थे

मुंबई: उत्पल दत्त (Utpal Dutt) की आज 27वीं पुण्यतिथि (Death Anniversary) है. आज की पीढ़ी इन्‍हें यूट्यूब (YouTube) और टीवी (TV) में आने वाली पुरानी कामयाब फिल्में गोलमाल, गुड्डी, दुल्हन वही जो पिया मन भाए, नरम गरम, हमारी बहू अलका जैसी फिल्मों में देखा है. उत्पल ने ज्यादातर कॉमेडी रोल किए. उत्पल दत्त मूलत: थियेटर आर्टिस्ट (Theater artist) थे. फिल्मों में वे क्यों काम करने लगे, इसके पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है.

शशि कपूर कनेक्शन
प्रसिद्ध कलाकार और फिल्म निर्माता शशि कपूर (Sashi Kapoor) के ससुर जैफरी कैंडल कोलकता में थियेटर कंपनी (Theater company) चलाते थे. उत्पल कॉलेज के जमाने में खूब नाटक खेला करते थे. जैफरी ने उन्नीस साल के उत्पल को अपने ग्रुप में शामिल कर लिया. उनके साथ उत्पल दत्त ने देश में घूम-घूम कर कई नाटक किए. इसके बाद उत्पल ने अपना खुद का लिटिल थियेटर ग्रुप (Little Theater Group) बना लिया, जिसमें वे कई अंग्रेजी और बांग्ला प्ले (play) करते थे. लिटिल थियेटर ग्रुप को एक प्रोडक्शन में भारी नुकसान हो गया. उसे चुकाने के लिए उत्पल दत्त ने तय किया कि वे फिल्मों में काम करेंगे और उस पैसे से कर्ज चुकाएंगे.

पहली हिंदी फिल्म थी अमिताभ के साथ
यह बात बहुत कम लोगों को पता है कि अमिताभ बच्चन की पहली फिल्म ‘सात हिंदुस्तानी’ ही उत्पल दत्त की भी पहली हिंदी फिल्म थी. हालांकि इस फिल्म में उत्पल दत्त को किसी ने नोटिस नहीं किया. लेकिन इसके साल भर बाद आई फिल्म ‘गुड्डी’ ने उनकी दुनिया बदल दी. इस फिल्म में उनका बड़ा और महत्वपूर्ण रोल था. जया भादुड़ी के अविवाहित मामा के रोल में उन्होंने गजब का काम किया था.

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सत्तर के दशक में उत्पल दत्त ने कई फिल्मों में अपनी छाप छोड़ी.
हृषिकेश मुखर्जी की कई फिल्मों में उन्होंने काम किया. आज भी अमोल पालेकर के साथ बनी उनकी कॉमेडी फिल्म ‘गोलमाल’ ऑल टाइम हिट मानी जाती है.

फिल्मों से ज्यादा थियेटर से आशिकी
उत्पल दत्त हमेशा कहते थे कि जैसे ही उनका कर्ज चुक जाएगा, वे कोलकता जा कर थियेटर का काम करेंगे. लेकिन ऐसा कभी हो नहीं पाया. उन्हें हिंदी और बांग्ला फिल्मों में काम मिलता गया और वे करते गए. उत्पल दत राजनीति में भी दखल रखते थे. कॉलेज के जमाने में वे कहा करते थे कि वे जिंदगी में दो ही काम करेंगे थियेटर और राजनीति. पर फिल्मों में आने के बाद ये दोनों ही काम पीछे छूट गया.