2 hobbies of Randeep Hooda’s childhood became his identity today] | Randeep Hooda के बचपन के 2 शौक, आज उनकी पहचान बन गए

मुंबई: रणदीप हुड्डा आज 44 साल के हो गए हैं. उनकी शानदार फिटनेस (Fitness) को देखते हुए फिल्म इंडस्ट्री (Film Industry) के टॉप 10 फिट कलाकारों में तो उन्हें शामिल कर ही लिया जाएगा. हालांकि इसके लिए उनके बचपन का एक शौक भी जिम्मेदार है. उन दो शौक में से एक जिनके चलते आज वो देश दुनिया में पहचाने जाते हैं- पहला थिएटर, दूसरा घुड़सवारी का शौक.

स्कूल के दिनों में जब वो थिएटर ग्रुप (Theater group) में शामिल हुए तो उनको जो पहला रोल दिया गया था, उसको देखने के लिए उनके मम्मी-पापा भी आए थे. उनको भी पता नहीं था कि बेटे को क्या रोल मिला है और शायद बेटे को भी आखिरी वक्त में बताया गया था, मोबाइल फोन थे नहीं सो, घरवालों को बता नहीं पाए वो. पूरा प्ले खत्म हो गया और मम्मी पापा स्टेज पर अपने बेटे को ढूंढते रहे, लेकिन कहीं दिखा नहीं तो वो बड़े उदास हो गए. उनको लगा होगा कि बेटे का रोल शायद कट गया.

उनको उस वक्त अपने बेटे की भी चिंता थी कि रोल कटने से वो भी उदास होगा, लेकिन जब बेटा मिला तो उसने बताया कि वो तो स्टेज पर ही था, लेकिन उसके मम्मी पापा उसे क्यों नहीं पहचान पाए ये वजह आपके लिए बेहद दिलचस्प होगी. दरअसल रणदीप को रोल मिला था एक शेर का, जिसके हिस्से में कोई डायलॉग नहीं था, बस शेर का मास्क और ड्रेस पहनकर कई मिनट तक गुर्राना या दहाड़ना था. ऐसे में ना चेहरा दिखा और ना आवाज सुनाई दी, कैसे पहचानते वो. आज भी ये बात शेयर करके हंसते हैं रणदीप हुड्डा.

बाद में उन्होंने नसीरुद्दीन शाह (Naseeruddin shah) का थिएटर ग्रुप ‘मोतले थिएटर ट्रुप’ (Motale Theater Troupe) ज्वॉइन कर लिया. दरअसल नसीर साहब से उनकी मुलाकात नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा की एक इमेजीनेशनल एंड इम्प्रूवाइजेशन वर्कशॉप में हुई थी, जिसको लेने नसीरुद्दीन शाह (Naseeruddin shah) दिल्ली आए थे. उसके बाद से वो उनके ग्रुप से जुड़कर कई सारे प्ले में हिस्सा लेने लगे. हुड्डा ने उनके लिए एक प्ले से लिखने की भी शुरूआत की, ली ब्लेसिंग के प्ले ‘ए वॉक इन द वुड्स’ को भारतीय माहौल के हिसाब से लिखकर. इस प्ले में एक्टिंग नसीरुद्दीन शाह ने भी की, और डायरेक्ट उनकी पत्नी रत्ना पाठक शाह ने किया था. नसीर को रणदीप हुड्डा अपना मेंटर मानते भी आए हैं.

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रणदीप हुड्डा का दूसरा शौक है एडवेंचर स्पोर्ट्स (Adventure sports) , दरअसल रोहतक के रहने वाले रणदीप हुड्डा का एडमीशन घरवालों ने सोनीपत के मोतीलाल नेहरू स्कूल ऑफ स्पोर्ट्स में करवा दिया था, वहां उन्होंने सभी तरह के खेलों में भाग लिया, यहां तक कि घुड़सवारी भी सीखी, एक्टिंग का कीड़ा भी उन्हें यहीं लगा. लेकिन अगले 17 साल तक वो मॉडलिंग, थिएटर और फिल्मों में ही फंसे रहे, फिल्मों में कई बार लम्बा ब्रेक भी हो जाता था. एक दो साल ऐसे भी आए जब कोई फिल्म नहीं मिली. लेकिन कुछ पैसा जरूर उन्होंने कमा लिया था, फिल्मों से भी और फिल्मों के जरिए जो पहचान मिली, उसके चलते मिले मॉडलिंग असाइनमेंट्स से भी.

उस पैसे को वो कहीं इन्वेस्ट करना चाहते थे, नसीरुद्दीन शाह (Naseeruddin shah) उन दिनों एक हॉर्स राइडिंग क्लब (Horse riding club) से जुड़े हुए थे. मिलन लूथरिया (Milan Luthria) और नसीरुद्दीन शाह के कहने पर उस क्लब की सदस्यता उनको भी मिल गई और कक्षा 8 में छोड़ी गई हॉर्सराइडिंग उनको फिर भाने लगी. वहां उन्होंने एक घोड़ा खरीद भी लिया, लेकिन 2 महीनों के अंदर वो घोड़ा मर गया. लेकिन हुड्डा ने फिर एक साथ 3 घोड़े खरीद लिए. कर्नल एसएस अहलावत (Colonel SS Ahlawat) और ब्रिगेडियर बिश्नोई (Brigadier Bishnoi) ने उन्हें प्रोफेशनल ट्रेनिंग देनी शुरू की. फिर उन्होंने चंडीगढ़ होर्स शो (Chandigarh Horse Show) से शुरूआत की, कई शहरों में होर्स शोज किए. लेकिन ये केवल शोज होते थे, कॉम्पटीशन नहीं था.

पहली बार हुड्डा ने कॉम्पटीशन में हिस्सा लेने का मन बनाया और उसी में उनकी घनघोर बेइज्जती हो गई. दरअसल उनको अब लोग जानने लगे थे, कई लोग तो उन्हीं को देखने या फोटो खिंचवाने के लिए होर्स शोज की टिकट लेने आते थे, आयोजक भी उन्हें पैसे देकर बुलाने लगे. लेकिन कॉम्पटीशन में तो सबकी नजरें ही उन पर थीं कि जीतेगा कि हारेगा, जैसे ही उनके घोड़े रणजी को एक बाधा पर जम्प लगाने की बारी आई, वो 180 डिग्री पर घूमा औऱ उलटी दिशा में भाग गया. हुड्डा ने एक इंटरव्यू में बताया कि वो दोनों फिर घंटों तक पेड़ों के पीछे शर्म से छुपे रहे.

लेकिन बाद में उनके उसी घोड़े रणजी ने उनको ढेर सारे कॉम्पटीशन जिताए, आज रणदीप हुड्डा के पास कई अच्छे घोड़े हैं, वो उन्हें मुंबई के महालक्ष्मी रेसकोर्स में रखते हैं, उनके शोज और रेस के जरिए वो पैसे भी कमाते हैं. पोलो मैच आदि में भी देश भर मे भाग लेते रहते हैं. दूसरा शौक भी जिंदा है. इसके साथ ही फिल्मों के अलावा थिएटर में भी दिख जाते हैं.